हम राम की केवल पूजा न करें, अपितु उनके गुणों को अपने जीवन मे उतारें:स्वामी कृष्णानंद

वीसीएन टाइम्स
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तिल्दा नेवरा  सद्गुरु धाम आश्रम गौरखेडा मे पाच दिवसीय महायज्ञ की पूर्णाहुति मे समय के सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज ने उद्घोष किया किया कि आज समय आ गया है राम को मंदिर मे बंद कर इति श्री ना किया जाए। बल्कि हर घर से अब राम के सामने आने की ज़रूरत है। भारत मे बार बार इतिहास नही लिखा जाता। एक बार राम का इतिहास लिखा गया, तो जब जब कोई राम इस पृथ्वी पर अवतरण लेगा तो राम के संविधान के अनुरूप कर्म करेगा।

स्वामी जी ने बताया की समय का सद्गुरु राम रूपी नायक की प्रतिक्षा करता है, और उचित पात्र मिलने पर उसमे रामत्व की ऊर्जा उडेल के उस पात्र को पूजनीय बना देता है, भगवान बना देता है। इसलिए बिना गुरु के मार्ग दर्शन व्यक्ति के जीवन मे परिवर्तन संभव नही। राम जैसे व्यक्ति मे साधुता के लक्षण पहले आते हैं, और फल स्वरूप जंगल मे वे वलकल वस्त्र धारण करते हैं। स्वामी जी ने बताया यज्ञ की रक्षा मे उतरने वाले राम से बड़ा धर्मात्मा कोई नही है। अपने पिता की आज्ञा मान कर जंगल स्वीकारने वाले राम से बड़ा त्यागी कोई नही है। जंगल जाकर आदिवासी और पिछड़े वर्ग को संगठित करने वाला राम से श्रेष्ठ सद् विप्र कोई नही है। व्यक्तिगत दुख झेलते हुए गुरुदेव विश्वामित्र के मार्गदर्शन से विमुख न होने वाले राम जैसा श्रेष्ठ गुरु भक्त कोई नही है। अपनी पत्नी के लिए राक्षस राज रावण से युद्ध मे उतरने वाला, राम से बड़ा पत्नी प्रेमी कोई नहीं है और वनवास से लौटकर भैया भरत को गले लगाने वाले राम से श्रेष्ठ भाई कोई नही है। इसी से भारत देश का चरित्र एक शब्द मे राम है।

स्वामी श्री ने बताया की हम सब मे भगवान राम और मा सीता का अंश मौजूद है, और अब समय आ गया है की हम   राम की केवल पूजा न करें, अपितु उनके गुणों को अपने जीवन मे उतारें।
पाच दिवसीय महायज्ञ  कबीर साहेब की वाणी के माध्यम से स्वामी जी लगातार पांच दिनों तक गुरु भक्ति और समर्पण पर धारा प्रवाह व्याख्यान करते रहे जिससे सैंकड़ो भक्त लाभांवित हुए। नव वर्ष मे आशीर्वाद देते हुए स्वामी जी ने कहा की हम सब भी उस राम रसायन को अपने जीवन मे उतारें, जिसका रसपान करते हुए संत कबीर, गुरु नानक देव, हनुमान जी, भगवान राम इत्यादि परमानंद को उपलब्ध हुए। सभी भक्तों ने साध्वी माँ आदिश्री द्वारा गायी राम कथा का रसपान भी किया तथा आचार्य संतोष शर्मा जी के नेतृत्व मे पंच कुंडीय यज्ञ मे सम्मिलित हो नववर्ष प्रारंभ किया। गुरुदेव के कार्यक्रम की पूर्णाहुति मे सैकड़ो भक्त ब्रह्म दीक्षा पा कर लाभांवित हुए।

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