Saturday, August 30, 2025
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‘खान सर’ के बाद अब ‘सैलून वाले गुरुजी’ सुर्खियों में छाए, छत्तीसगढ़ में शिक्षक ‘पूनाराम’ पढ़ाई के साथ मुफ्त में काटते हैं ‘बच्चों के बाल’

कवर्धा-सैलून वाले गुरुजी’ नाम से छत्तीसगढ़ के एक शिक्षक इन दिनों सुर्खियों में हैं। कबीरधाम जिले की एक माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक ‘पूनाराम पनागर’ गरीब और आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनके बाल भी काटते हैं, वे काम के प्रति समर्पण और सेवाभाव के कारण शिक्षकों के लिए मिसाल बन गए हैं…अपनी इस अनूठी कार्यशैली और सोशल सर्विस के कारण देश में खान सर की तरह ही.वे छत्तीसगढ़ के’सैलून वाले गुरूजीबन गए है ।
एक तरफ जहां सरकार स्कूलों की बढ़ाहल और शिक्षकों की लापरवाही की खबरें आए दिनों सुर्खियों में रहती है. वहीं दूसरी ओर कबीरधाम जिले के एक स्कूल में शिक्षक अपनी सेवा भावना से मिसाल बन गए हैं। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बोडला में पदस्थ शिक्षक ‘पूनाराम पनागर बच्चों को पढ़ाने ने के साथ उनके मुफ्त में  बाल भी काटते हैं।
उनके इस पहल की वजह से लोग उसे सैलून वाले गुरुजी कहते हैं। पुनाराम पनागर बच्चों के बाल काटने का काम पिछले 12 सालों से करते आ रहे हैं ..जब वह आदिवासी इलाके  के महलीधार गांव के प्राथमिक शाला में पदस्थ थे. तो उन्होंने देखा कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सैलून नहीं होने के कारण बच्चों के बाल काफी बढ़ जाते हैं .तब उन्होंने खुद ही बच्चों के बाल काटने शुरू कर दिए बाद में उसका तबादला बोडला हो गया जिसके बाद उन्होंने यह सेवा यहां भी जारी रखी। यह वह शिक्षक है जो बच्चों को पढ़ते ही नहीं है बच्चों को सवारते भी हैं पूनाराम बच्चों से कहते हैं कि वे बाल कटिंग पर खर्च होने वाले पैसों को बचाकर कॉपी, पेन और पढ़ाई से जुड़ी अन्य ज़रूरी चीज़ें खरीदें।

शिक्षक पूनाराम बच्चों की मुफ्त कोचिंग भी करते हैं। वे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिता कराते हैं और जो विद्यार्थी ज़िले या प्रदेश स्तर पर टॉपर बनते हैं, उन्हें अपनी ओर से 10 से 15 हज़ार रुपये तक का इनाम भी देते हैं। इसके अलावा वे हर साल पर्चे छपवाकर लोगों से अपील करते हैं कि बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में ही कराएं।

पूनाराम की इस पहल की सराहना न सिर्फ बच्चे और अभिभावक, बल्कि अन्य शिक्षक भी करते हैं। स्कूल के साथी शिक्षक कृष्ण कुमार धुर्वे बताते हैं, ‘पूनाराम सर’ बच्चों की शिक्षा को लेकर बेहद सजग हैं। उनकी सोच है कि बच्चों के पैसे बचें और वे उनका उपयोग पढ़ाई के अन्य ज़रूरी साधनों में करें। साथ ही वे गरीब और कमजोर बच्चों को फ्री कोचिंग देते हैं और टॉप करने वालों को इनाम भी प्रदान करते हैं।

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