Saturday, August 30, 2025
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छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला…पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की याचिका पर सुनवाई पूरी:हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला रखा सुरक्षित

बिलासपुर-छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले केस में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। केस की सुनवाई जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच में हुई। इस दौरान लखमा की तरफ से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा।

बता दें कि ED ने लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही शराब घोटाले के केस में ईओडब्ल्यू ने भी केस दर्ज किया है, जिसकी जांच के बाद चार्जशीट पेश किया गया है। इस मामले में भी ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया है। कवासी लखमा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई है।

शुक्रवार को जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच केस में बेल पर सुनवाई हुई, जिसमें तर्क दिया गया कि साल 2024 में केस दर्ज किया गया था, जिसमें डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी की गई है, जो गलत है। इस दौरान लखमा का कभी पक्ष ही नहीं लिया गया। यह भी बताया गया कि केवल बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है। जबकि, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। पूर्व मंत्री को राजनीतिक षडयंत्र के तहत फंसाने का आरोप लगाया गया है।

सुनवाई के दौरान EOW की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि चार्जशीट के मुताबिक कवासी लखमा के बंगले में हर महीने 2 करोड़ रुपए कमीशन पहुंचता था। कोर्ट को बताया गया कि शराब घोटाला सिंडीकेट की तरह चलता था, जिसमें अधिकारी से लेकर मंत्री तक कमीशन लेते थे।

EOW के अधिकारियों ने लखमा के 27 करीबियों से बयान लेकर इस बात के सबूत इकट्‌ठा किए हैं। जिसमें उनकी भूमिका और मिलीभगत के सारे साक्ष्य मौजूद हैं। ED की जांच में भी पता चला है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को कैसे अंजाम दिया गया था।

ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई।

ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे।

ED ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई।निदेशालय की ओर से लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर कहा गया कि ED की जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2161 करोड़ रुपए है।

आज जब जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच केस में बल पर सुनवाई हुई. लखमा के वकील ने तर्क दिया कि 2024 में केस दर्ज किया गया था जिसमें डेढ़ साल बाद गिरफ्तार की गई जो गलत है। वकील ने यह भी कहा कि लखमा के खिलाफ कोई सबूत नहीं है .उसे राजनीतिक शनि यंत्र के तहत फसाया गया है। जबकि EOW की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि चारशिट के मुताबिक कवासी लखमा के बंगले में हर महीने दो करोड रुपए कमीशन पहुंचना था। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि शराब घोटाला सिंडिकेट की तरह चलता था। सुनवाईके बाद फैसले को सुरक्षित रखा गया है. अब देखना यह है कि लकमा को बेल मिलती है या अभी और जेल में ही रहेंगे ,वीसीएन टाइम्स रायपुर

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