तिल्दा नेवरा-तिल्दा सिंधी पंचायत चुनाव को लेकर अब कभी भी महाभारत छिड़ सकती है। सिंधी पंचायत रुपी द्रोपदी का खुलेआम चीर हरण हो रहा है,और धृतराष्ट्र के दरबार में समाज के सदस्य अंधे बनकर.आंखों में पट्टी बांधकर महाभारत होने का इंतजार कर रहे हैं। पंचायत में क्या हो रहा है, किस तरह से समाज के पैसों का बंदर बांट किया जा रहा है, यह सब कुछ देख कर भी ज्यादातर धृतराष्ट्र के दरबारी अंधे बने हुए हैं। और पंचायत रूपी द्रौपदी का चीर हरण देख रहे हैं। समाज के तथा कथित समाजसेवी और पंचायत के दुर्योधन और शकुनि रूपी सदस्य समाज को तोड़ने में लगे हुए हैं। पंचायत के जो सदस्य अपने आप को समाज का ठेकेदार समझते हैं। गहराई में जाकर देखें तो उन ठेकेदारों की घर में ही पूछ परख नहीं होती है।
तिल्दा सिंधी पंचायत का चुनाव हुए 3 साल गुजर गए। हलाकि चुनाव 2 साल के लिए कराए थे .लेकिन बाद में कार्यकाल बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया। जब चुनाव हुआ था तो वर्तमान अध्यक्ष ने लोगों के सामने हाथ फैला कर कहा था कि एक बार मुझे मौका दिया जाए। और समाज ने उसे मौका दिया भी। लेकिन समय गुजर जाने के बाद भी वे कुर्सी पर जमे हुए हैं। जबकि उसे नैतिकता और नियम के अनुसार अगस्त के दूसरे पखवाड़े में नए मुखी के चुनाव का ऐलान कर दिया जाना था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। लोगों के सामने हाथ फैलाकर अध्यक्ष बने शमनलाल खूबचंदानी जी. अब कुर्सी का मोह छोड़ नहीं पा रहे हैं।
अध्यक्ष बनने के पहले उन्होंने समाज को बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। वे तो पूरा कर नहीं सके अब लोगों से यह कहकर एक साल के कार्यकाल बढ़ाने की बात कह रहे हैं कि. उनका सपना है कि समाज के नए भवन के लिए सरकार के द्वारा जमीन देने तक मुखी बने रहे । दरअसल सरकार द्वारा सिंधी समाज के लिए जो जमीन एलाट की गई थी, विवाद के कारण वह जमीन समाज के नए भवन के लिए अभी तक नहीं मिल पाई है।विवाद के पीछे कौन है ?यह किसी से छुपा हुआ नही है, समाज के मुखी चुनाव के पहले सीना तानकर यह कहा गया था कि 3 साल के अंदर समाज का नया भवन तैयार किया जाएगा। लेकिन 3 साल तक मुखिया और उसके दरबारी जमीन भी नहीं हासिल कर सके।
दरअसल अध्यक्ष कुछ ऐसे लोगों से घिरे हुए हैं .जिनका काम ही जमीन हथियाना और ऐसे विवादों से उनका जुडाव रहा है।गड़बड़ी की कोशिश उसे एक शहर से उसे भगा दिया गया था ।पंचायते समाज के भलाई के लिए गठन की जाती है लेकिन तिल्दा सिंधी पंचायत में ज्यादातर ऐसे पदाधिकारी है,जो अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए समाज सेवा का ढोंग रच रहे हैं।इन ल्प्गो ने सिंधी पंचायत भवन.को किराया कमाने वाला भवन बनाकर रख दिया है।
कभी कोई समाज का व्यक्ति मुखिया और पदाधिकारी का खास बनकर दूसरे को किराए पर देने के लिए अपने नाम से भवन को बुक कर लेता है. तो कभी। मुखिया नेताओं को खुश करने के लिए अपने नाम से भवन को बुक कर लेते हैं। दरअसल पंचायत भवन मुखिया और उनके चेहेतो का दुकान बंनकर रह गया है। यहां समाज सेवा नहीं बल्कि दुकानदारी होती है। इसीलिए जब किसी सिंधी समाज के घर में गमी होती है और पगड़ी रस्म के लिए भवन की मांग की जाती है तो अपने आकाओ को खुश करने के लिए मुखिया अपने नाम से भवन को बुक कर लेते हैं। पर वे शायद भूल चुके हैं कि पंचायत भवन समाज की पूंजी है ना कि उनकी जागीर।
एक शायर ने लिखा है कि,’ जो खानदानी रईस है वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना… ‘तुम्हारा मिजाज बता रहा है तुम्हारी दौलत और औकात नई-नई है’!अपने समाज के बुजुर्गों को दरकिनार कर दूसरों को सम्मान देने वाले सिंधी समाज के मुखियां जान ले की जो समाज डरा हुआ होता है, उस समाज में साइंटिस्ट कम गुलाम ज्यादा पैदा होते हैं,, जहां साहस है वही हनुमान है । यदि हनुमान बनकर समाज को आगे बढ़ाएंगे अर्थात समाज रूपी धर्म के साथ खड़े रहेंगे तो, हम भी झुक कर सलाम करेंगे..चरण वंदन करेगे ..वरना यही कहेंगे कि आप अधर्मी हो अधर्म के साथ डूब जाए ?
सिंधी पंचायत का चुनाव सही समय पर हो इसी में समाज की भलाई है। मै पोर्टल न्यूज़ के संपादक के पहले समाज का एक व्यक्ति हु साथ ही समाज का एक सिपाही भी हूं। इसीलिए मेरा धर्म है कि मैं अधर्म होने ना दूं। आपको बता दूं . पद -मद और कद इन तीन चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है.. आप सब जानते हैं पद और मद स्थाई होता है. परंतु एक ही चीज है वो है ‘कद’ जो अगर अच्छा काम करता हो तो उसके लिए आपको लोग याद करेंगें। और फिर आपके साथ वे हमेशा बना रहता है.. इसलिए ध्यान दिलाना चाहूंगा यदि पद को मद हो जाता है तो उसका कद तो कम हो ही जाता है।मुखिया अगर समाज के भवन के लिए जमीन दिलाने के लिए 1 साल का कार्यकाल बढ़ाना चाहते हैं तो तत्काल एक समाज की आम बैठक पंचायत भवन में बुलाएं और सबकी राय लेकर सर्वसम्मति से आगे बढ़े। हमारा भी बाहर से समर्थन होगा । ऐसे में यदि समाज के ऊपर कभी भी कोई विपदा आई तो पहले सर कलम हमारा होगा। जय समाज
इंदर कोटवानी की कलम ..