तखतपुर-छत्तीसगढ़ के तखतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए पहुंची एक महिला की घुप अधेरे में मोबाईल की लाईट में डिलवरी कराई गई।जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ का दावा है की आपात स्थिति में इनवेटर से लाईट जलाने की व्यवस्था है.लेकिन यहा देख सकते है,की लाईट बंद होने के बाद अस्पताल परिसर में अँधेरा छाया हुआ है.जजकी रूम में भर्ती माताए नवजात बच्चो को गोद में लेकर गर्मी से बचाने हाथो में झुला रही है.
सुरक्षित और संस्थागत प्रसव के लिए सरकार भले ही बेहतर सुविधा का दावा करती हो. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बायां करती है.ताजा मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है -जहां सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए आई गर्भवती महिला का अंधेरे में मोबाईल की लाईट में डिलवरी कराई गई। जिस समय प्रसूता अस्पताल पहुची उसी समय असपताल की बिजली गुल हो गई लिहाजा मोबाईल की रौशनी में प्रसव कराया गया .
लाईट दिखाते हुए दरअसल बेलसरी निवासी ज्योति नाम की महिला को घर में प्रसव पीड़ा उठने पर उसे तखतपुर के स्वास्थ्य केंद्र लाया गया.अस्पताल पहुचते ही महिला दर्द से कराहने लगी उसे डिलवरी के लिए तत्काल ओटी में ले जाया गया लेकिन उसी समय अचानक स्वास्थ्य केंद्र की लाईट बंद हो गई ,और डिलवरी रुम सहित अस्पताल के अंदर और बाहर चारों तरफ अंधेरा छा गया .स्टाप के बताए अनुसार यहाँ जनरेटर की व्यन्स्था नही है,जबकि अस्पताल में लगा इनवेटर काम नही कर रहा था. इस बीच ओटी के अन्दर अँधेरे में टेबल पर लेटी प्रसूता प्रसव पीड़ा से कराहते पसीने से तरबतर होती रही, जिससे रूम में अफरा तफरी मच गई।
लाईट बंद होने से परेशान स्वास्थ्य केंद्र की नर्से ने जब देखा की लाईट का आना सभव नही है और डिलवरी के लिए प्रसूता को ज्यादा देर के रोके रखना जान के लिए खतरा हो सकता है .तो उसने हिम्मत दिखाई औरअपनी मोबाईल की लाईट पर महिला की सुरक्षित डिलवरी कराई. कुछ देर बाद नर्स ओटी से बाहर आकर वहां खड़े एक व्यक्ति से मोबाईल की मांग करती है मोबाईल देने से नाकानी करने पर नर्स की उस व्यक्ति से कहासुनी भी होती है.उसके बाद नर्स मोबाईल को लेकर लेकर फिर से ओटी के अन्दर जाती है,दरअसल डिलवरी के बाद मोबाईल की लाईट के सहारे ही महिला को टांके भी लगाने थ .उसे इस बात का डर था कि टाके लगते समयउसकी मोबाईल की लाईट बंद हो जाए. इसलिए वह दूसरी मोबाईल लेने बाहार आई थी. और मोबाईल को लेकर उसकी बहस हो गई ..
हलाकि टांके देर से लगने और महिला का रक्त स्त्राव बढ़ जाने से उसका खून ज्यादा मात्त्रा में बह चूका था . खून को देख परिजन कुछ देर के लिए सकते में आ गए थे .ओटी के अन्दर में बिना लाईट घंटो टेबल पर लेटी के प्रसूता के साथ आई महिला प्रसूता को अपने साड़ी के पल्लू से हवा देने पल्लू को हाथ से घुमाती रही.ताकि गर्मी से उसे राहत मिल सके. डिलवरी के बाद जच्चा बच्चा स्वस्थ है. बताया जाता है कि प्रसूता जब अस्पताल पहुंची थी उसे समय लाइट जल रही थी लेकिन उसके पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही लाइट का एक फेस बंद हो गया.लेकिन उसे सुधारने वाला कोई सामने नहीं आया और नर्स ने जोखिम लेकर महिला की मोबाइल की लाइट से डिलीवरी कराई।
छत्तीसगढ़ की सरकारी अस्पतालों में लाइट बंद होना डॉक्टर का अस्पताल में नहीं रहना,एंबुलेंस का समय पर नहीं पहुंचाना,या नहीं मिलना कोई नई बात नहीं है।सरकार के लाख दावे के बावजूद सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो रही हैं. ऑपरेशन हो रहा हो या डिलीवरी बिजली गई तो मरीज की जान जाए या बचे, इससे ना अस्पताल प्रशासन को कोई लेना देना है.ना ही सरकार को,सरकार अस्पतालों में सुविधाओं के होने का दवा तो करती है लेकिन वे सिर्फ कागजों पर ही दिखते हैं। यदि सकरी दावे अनुसार सुविधाए होती तो तखतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मोबाईल की रोशनी में डिलीवरी नही होती .ना ही. कोई माता सरगुजा में अस्पताल में फर्श पर बच्चे को जन्म देती . तखतपुर से वीसीएन टाइम्स के लिए टेकचंद कारडा की रिपोर्ट.