Saturday, August 30, 2025
Homeछत्तीसगढ़.55 साल की उम्र में महिला ने दिया 17 वें बच्चे को...

.55 साल की उम्र में महिला ने दिया 17 वें बच्चे को जन्म..बेटा-बहू नाती-पोते सभी बधाई देने पहुंचे अस्पताल ..

उदयपुर- राजस्थान के उदयपुर जिले के झाड़ोल इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहाँ 55 साल की एक महिला ने अपने 17 वें बच्चे को जन्म देकर सभी को हैरान कर दिया है. 16 बच्चों की मां को अस्पताल में यह कहकर भरती कराया गया की उनकी चौथी  डिलवरी है. प्रसव पीड़ा के बाद डॉक्टरों की देख रेख में उसने बच्चे को जन्म दिया. तब पता चला कि वह पहले से ही 16 बच्चों की मां है। उनमें से 11 बच्चे अभी भी जीवित है। जबकि चार बेटे और एक बेटी जन्म के तुरंत बाद ही चल बसे थे। इतना ही नहीं 16 में से पांच बच्चों की शादी हो चुकी है और वे भी दो-तीन बच्चों के माता-पिता बन चुके हैं। यानी की महिला दादी नानी बन चुकी है। डाक्टरों  की माने तो उम्र बढ़ाने के बाद नेचरली प्रेग्नेंट संभव है. लेकिन यह अत्यंत दुर्लभ और जोखिम भरा होता है ‌। फिलहाल अस्पताल में बच्चा जच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

एक तरफ जहां सरकार देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम चला रही है, वहीं दूसरी तरफ उदयपुर के एक सुदूर ग्रामीण इलाके से आई खबर ने सबको चौंका दिया है. राजस्थान के आदिवासी अंचल में शामिल झाड़ोल क्षेत्र के लीलावास गांव की रहने वाली रेखा कालबेलिया ने झाड़ोल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया है. 55 साल की उम्र में मां बनने की यह घटना अपने आप में अनोखी है. इस घटना ने न सिर्फ इलाके में कौतूहल पैदा किया है, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को भी उजागर कर दिया है.

जहां एक ओर सरकार “हम दो, हमारे दो” का नारा देकर परिवार नियोजन को बढ़ावा दे रही है, वहीं रेखा कालबेलिया का बड़ा परिवार सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है. परिवार नियोजन के लिए सरकार गांवों में नसबंदी शिविर लगाती है, लोगों को जागरूक करने के लिए प्रलोभन देती है, लेकिन इस घटना से साफ है कि ये प्रयास शायद उतने सफल नहीं हो पा रहे, जितनी उम्मीद की जाती है. हलाकि ‘आदिवासी समाज में बड़े परिवार की अवधारणा आज भी प्रचलित है.कई बार लोग स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक नहीं होते. यह मामला एक उदाहरण है कि हमें परिवार नियोजन कार्यक्रमों को और भी प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है.’

उधर रेखा कालबेलिया के परिवार में नए सदस्य के आने की खुशी में पूरा परिवार अस्पताल पहुंच गया. इस मौके पर बधाई देने वालों में सिर्फ पति और बच्चे ही नहीं, बल्कि उनके पोते-पोती और दोहिते-दोहितियां भी शामिल थे. रेखा के 17 बच्चों में से 7 लड़के और 4 लड़कियां जीवित हैं, जबकि 5 बच्चों की जन्म के बाद मौत हो चुकी है. उनके कई बच्चों की शादियां हो चुकी हैं और उनके भी 2 से 3 बच्चे हैं. रेखा की बेटी शीला कालबेलिया ने बताया कि उनके परिवार में हमेशा से ही बच्चे ज्यादा रहे हैं और वे इस नए सदस्य के आने से बहुत खुश हैं. वहीं, रेखा के पति कवरा कालबेलिया ने कहा कि भगवान की मर्जी से उनके इतने बच्चे हुए हैं और वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं.एक और सरकारें 21वीं सदी में देश को विकसित बनाने का संकल्प ले रही है. वहीं दूसरी ओर आदिवासी अंचल की रहने वाली रेखा अपनी 70 वीं संतान को जन्म दे रही है। अब इस सिस्टम की नाकामी कहे या रेखा का अशिक्षित होना‌। लेकिन एक बात तो साफ है कि सरकार की योजनाएं आदिवासियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही है आदिवासियों की भलाई के लिए शुरू की गई ज्यादातर योजनाएं कागजों पर सीमित रह जा रही है. इसका जीता जागता उदाहरण रखा है। ब्यूरो रिपोर्ट वीसीएन टाइम्

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments