कोई एक्स्ट्रा कोचिंग नहीं ली. स्कूल में पढ़ाई के बाद में खुद घर पर 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे.
तिल्दा नेवरा-,कहते हैं न जब कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी चुनौती मंजिल तक पहुंचने में बाधा नहीं बन सकती।शहर के तिल्दा के कार्मल स्कूल में 10 वी और बिडला स्कुल रावन में 12 वी पास कर रायपुर के रविशंकर शुक्ल युनियरसिटी में बीए.एल.एल बी में क्लास में प्रथम आने वाले अनुज वाधवा के द्वारा लिखी सफलता की इबारत के बाद 20 फरवरी को रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित 27 वे दीक्षांत समरोह में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के महानिदेशक प्रोफेसर बुद्ध रश्मि मणी और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और कुलाधिपति विश्व भूषण हरिचंदन एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष उपस्थिति में शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा जब गोल्ड मेडल से नवाजा गया तो दर्शक़ दीर्घा में बैठे अनुज के पिता एडवोकेट और राम वाधवा का सीना गर्व से चौड़ा हो गया..और उनकी आंखों से खुशी के अश्रु बहने लगे.
प्राथमिक शिक्षा से ही मेधावी छात्र रहे अनुज को,पिता अपने बड़े पुत्र अमन वाधवा की तरह वकील बनना चाहते थे.और उनका सपना पूरा भी हुआ.. राम वाधवा ने बताया कि बहुत कम लोग होते हैं जो अपना निर्धारण लक्ष्य प्राप्त कर पाते हैं..अमन ने कोई एक्स्ट्रा कोचिंग नहीं ली स्कूल में पढ़ाई के बाद में खुद घर पर 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे.।
मेरे वकालत में आने के बाद मेरे दोनों बेटों ने भी अपनाइ वकालत,,
एडवोकेट राम वाधवा ने बताया कि 1998 में रवि शंकर विश्वविद्यालय से बा और दुर्गा कॉलेज से एलएलबी की थी. मैं अपने परिवार में पहला व्यक्ति था जो की वकालत की पेशी में आया उनके पहले कोई भी वकालत में नहीं था. मेरे दो बेटे हैं बड़ा बेटा अमन वाधवा बी एडवोकेट है और रवि शंकर विश्वविद्यालय से वे तीन गोल्ड मेडल प्राप्त कर सम्मानित हो चुके हैं. बड़े बेटे की एडवोकेट बनने के बाद मेरा सपना था कि छोटा बेटा भी लिए बने. जो बेटे ने पूरा कर दिखाया अब पुत्रवधू मानवी वाधवा बिलाल ग्रेजुएट कर चुकी है और ज्यूडिशरी की तैयारी कर रही है.। मुझे पूरा विश्वास है कि जल्दी मानवी भी एडवोकेट बनेगी .।अधिवक्ता संघ रायपुर और तिल्दा एडवोकेट अनुज वाधवा को गोल्ड मेडल से नवाजे जाने पर खुशी जाहिर करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है.वही परिवार व कॉलेज के साथ शहर व समाज में खुशी का माहौल है।

