तिल्दा नेवरा-नहाय-खाय के साथ लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। शहर के तिल्दा बस्ती तालाब और पास के नदी पर सुबह से ही व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है। व्रतियों ने गंगा में स्नान किया। नए कपड़े पहनकर भगवान भास्कर की पूजा की। इसके बाद नदी का पानी लेकर व्रती घर पहुंचे। इसी पानी से कद्दू-भात, चने की दाल का प्रसाद बनाया गया। व्रती आज इसे ही खाएंगे।
महापर्व के पहले दिन भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल बनती है। जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
कद्दू भात खाने का महत्व
मन, वचन, पेट और आत्मा की शुद्धि के लिए छठ व्रतियों के पूरे परिवार के साथ कद्दू-भात खाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। कद्दू में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। जिससे इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है।
छठ महापर्व आज से 3 दिन सात्विक अंक
छठ महापर्व यानी सात्विकता श्रद्धा और पवित्रता का ऐसा पर्व जो न सिर्फ बिहार बल्कि पूरी दुनिया में आस्था का प्रतीक है. यह पर्व भगवान भास्कर के प्रति समर्पण और निष्ठा का अनुपम उदाहरण है .पर्व के दौरान भारतीयों और उनके परिवार का संयमित सात्विक जीवन एक प्रेरणा है. यह हम सबको याद दिलाता है की आस्था और सिद्धा का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है

