बालोद: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है. बालोद में मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे. यहां धर्मांतरित ओबीसी परिवारों ने अपने लिए अलग कब्रिस्तान की मांग की है. वीएचपी और गांव के अन्य लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है. उन्होंने हिंदू जाति को नहीं छोड़ा है. इसलिए हम इस मांग का विरोध कर रहे हैं. इस मुद्दे पर भारी बारिश में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और नेताओं नेरैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की है.
विश्व हिंदू परिषद का आरोप है कि प्रत्येक रविवार को जो प्रार्थना सभाएं जिले के विभिन्न जगहों पर आयोजित हो रही है. उसे बंद करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.इसके बावजूद अब तक इस मुद्दे पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वीएचपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह पूरा मामला हीरापुर गांव से शुरू हुआ जहां ओबीसी वर्ग के कुछ परिवारों ने गांव में अलग से कब्रिस्तान बनाने की मांग की है.जिसके बाद गांव में विवाद उपजा और अब पूरे जिले भर के लोगों ने इसके विरोध में आज मार्च निकालकर इन मांगों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा .
जिलाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष,बलराम गुप्ता ने जिला प्रशासन से प्रार्थना सभाओं के विषय को लेकर बात को रखा गया. उन्होंने कहा बारिश होने के बावजूद लोग अपने हिन्दू धर्म को बचाने के लिए उतरे हुए हैं.धर्म परिवर्तन करने वाली ताकते इस सरकार में लगातार बढ़ रही है. हम हिन्दू समाज अब एकत्र हो रहे हैं. गांव-गांव से आवाज उठ रही है. हम अलग कब्रिस्तान की मांग का विरोध कर रहे हैं-
“गांव में माहौल बिगड़ रहा है”: इस पूरे मुद्दे पर जिला पंचायत के पूर्व सदस्य कीर्तिका साहू ने कहा कि गांव में कुछ साहू और निषाद परिवार के लोग क्रिश्चियन विचारधारा की बात कहकर अलग कब्रिस्तान बनाने की मांग कर रहे थे, उनका नाम हिन्दू है. जाति हिंदू धर्म के अनुसार है तो आखिर क्यों वो ये मांग कर रहे हैं. ऐसे लोगों की विचारधारा के खिलाफ हम आज सड़क पर उतरे हैं.
मेरे पूरे गांव के महिलाएं, बच्चे और पुरुष सहित सभी वर्ग के लोग इस मार्च में शामिल हुए हैं. हर वर्ग के लोग आज पैदल मार्च में शामिल हुए हैं. कुछ परिवार कम्युनिटी को बरगलाने का काम कर रहे हैं. यह सही नहीं है. – कीर्तिका साहू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य
अभी दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी का मुद्दा थमा भी नहीं था कि बालोद में भी धर्मांतरण से जुड़े इस विवाद ने बवाल का रूप ले लिया है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करती है.