शिक्षा
जनता नहीं नादान यकीन मानिये,सुनाया है हार का फरमान, सच जानिये

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव खरी… खरी…
वसुंधरा सीएम पद से दूर,
हमसे क्या भूल हुई जो ये सजा हमको मिली: दीपक बैज,
जनता नहीं नादान यकीन मानिये,सुनाया है हार का फरमान, सच जानिये
दिलचस्प: वसुन्धरा नहीं: बातचीत शुरू करने से पहले एक दिलचस्प बात आपको बता दें कि एक भविष्यवणी के अनुसार
वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगी।
हालांकि उन्होंने विधायकांे की बैठकें करके दबाव बनाने की मुहिम चालू कर दी है मगर दबाव में आना भाजपा हाईकमान के स्वभाव में नहीं। और फिर कुदरती संकेत उनके मुख्यमंत्री बनने के अनुकूल नहीं हैं।
हमने काम किया,पर जनता ने झूठ का साथ दिया
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख दीपक बैज ने एक बयान मे कहा कि हमारे काम पे भाजपा का झूठ भारी पड़ गया। ये बात उन्हांने सही नहीं कही।
फिर आगे कहा कि ‘हमने पांच साल काम किया, उसके बाद भी अगर कमियां रहीं तो समीक्षा करेंगे’ ये बात बैज ने आधी सही कही।
पहली बात कि यदि आपने काम किया था तो जनता को क्या मोतियाबिंद है कि आपका काम दिखा नहीं। आप अगर सच्चे थे और भाजपा झूठी तो जनता क्या मूर्ख है कि आपकी सच्चाई को देख नहीं पाई ?
पहली बात कि यदि आपने काम किया था तो जनता को क्या मोतियाबिंद है कि आपका काम दिखा नहीं। आप अगर सच्चे थे और भाजपा झूठी तो जनता क्या मूर्ख है कि आपकी सच्चाई को देख नहीं पाई ?
आपने जितना काम किया उससे अधिक तो ढिंढोरा पीटा। भाजपा अगर झूठी थी तो क्या जनता इतनी नादान है कि भाजपा को सर पर बिठा दिया। इतनी सीटें दे दीं जो भाजपाई खुद भी नहीं सोच पाए।
रहा सवाल समीक्षा का, तो समीक्षा तो होती ही है। हर दल करता है। पर समीक्षा ये नहीं होती कि कहां क्या काम रह गया कि जनता ने नकार दिया या ये नहीं कि आमजन के अधिकार और सम्मान के साथ न्याय करने मे कसर रह गयी।
बल्कि ये समीक्षा की जाती है कि मैनेजमेन्ट में कहां कसर रह गयी। पैसे बांटने में कहां कमी हो गयी, जातिवादी कार्ड के खेल में कहां चूक गये।
पीसीसी चीफ की ये बात कुछ हजम नहीं हुई।
बल्कि ये समीक्षा की जाती है कि मैनेजमेन्ट में कहां कसर रह गयी। पैसे बांटने में कहां कमी हो गयी, जातिवादी कार्ड के खेल में कहां चूक गये।
पीसीसी चीफ की ये बात कुछ हजम नहीं हुई।



