रायपुर.दिल्ली=छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है ED के मामलो को लेकर लगाई अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट जाने का सलाह देते हुए .इस याचिका को सुनने से इंकार कर दिया वही दूसरी याचिका पर सुनवाई 6 अगस्त को होगी .
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि दोनों ने एक ही याचिका में PMLA के कई सेक्शन को को चुनौती देने के साथ-साथ जमानत जैसी व्यक्तिगत राहत की मांग भी की गई है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब किसी मामले में कोई प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होता है तो सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करता है. यदि हम ही सब केस सुनेंगे तो बाकी अदालते किस लिए है. अगर ऐसा होता रहा तो फिर आम आदमी कहां जाएंगे. एक साधारण आदमी और वकील के पास पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई और स्पेस ही नहीं बचेगा।
उधर शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की रिमांड फिर बढ़ गौ है.चैतन्य को 18 अगस्त तक 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है..प्रवर्तन निदेशालय ED आर्थिक अपराध शाखा EOW और केन्द्रीय जाँच बियूरो CBI मामले की जाँच कर रही है .
गिरफ्तारी से बचने भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकान्त और जस्टिस जाय माला बागची की बेंच में सुनवाई हुई .भूपेश बघेल की 2 अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी। जिसमे एक ED और उसके उप निदेश्क्के खिलाफ है .व्ही दूसरी याचिका CBI छत्तीसगढ़ राज्य के खिलाफ है ,
इसके अलावा शराब घोटाला केस में जेल में बंद भूपेश बघेल के बेटे चेतन्य ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका याचिका लगे है उन्होंने ED की गिरफ्तारी को चुनौती दी है ,व्ही EOW की गिरफ्तारी से बचने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई है..
पूर्व सीएम बघेल ने याचिका में मांग की थी कि, उन्हें इन मामलों में किसी भी तरह से गिरफ्तार न किया जाए और जांच में सहयोग करने का अवसर दिया जाए। भूपेश बघेल ने याचिका में यह भी उल्लेख किया था कि, जिस तरह उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष के चलते की गई, उसी तरह उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।भूपेश बघेल की EDके मामलों को लेकर लगाई 2 याचिकाओं में से याचिका क्रमांक 303 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया. जिसके बाद वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका को वापस ले लिया वही याचिका क्रमांक 301 पर अब 6 अगस्त को सुनवाई होगी. भूपेश बघेल ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लांड्रिंग एक्ट पीएमएलए की कुछ धाराओं की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी याचिका क्रमांक 330 में उन्होंने मुख्य रूप से धारा 45 की व्याख्या को चुनौती दी थी
इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए खा की हर बार ऐसे अपवाद केवल प्रभावशाली लोगो के मामलो में क्यों आते है आम नागरिको और वकीलों के लिए फिर इस कोर्ट में क्या जगह बचेगी . पूर्व सीएम भूपेश बघेल ओर से कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी।.